हाथरस की असली साजिश : प्रियंका गांधी ने ‘नकली नक्सली भाभी’ को लगाया था गले, पीड़िता के भाई की नहीं हुई है शादी !

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हाथरस कांड में हर दिन नया खुलासा हो रहा है. जब मामला सामने आया था तो पीड़िता की ओर से मीडिया के सामने एक महिला की एंट्री हुई थी. उसने खुद को पीड़िता की भाभी बताया था. उसने मीडिया को जो बयान दिए वो भड़काने वाले थे. लेकिन जल्द ही खुलासा हुआ की पीड़िता के भाई की शादी ही नहीं हुई तो ये भाभी कहां से आ गई।

पुलिस को भी शक हुआ और उसने इस मामले में पड़ताल शुरू की. लेकिन महिला बहुत शातिर निकली. पुलिस जांच की भनक लगते ही वह वहां से रफूचक्कर हो गई. अब पुलिस ने जब उसकी कॉल डिटेल खंगाली तो पता चला कि वह नक्सलियों से बात करती थी. उसका हाथरस के पीड़िता परिवार से कोई रिश्ता नहीं है।

इस ताजा जानकारी को लेकर सोशल मीडिया में ट्विटर पर #FakeNaxalBhabhi ट्रेंड करने लगा. इतना पता चलते ही ट्विटर पर इस भाभी की चर्चा तेज हो गई. कुछ ही देर में ‘फेक नक्‍सल भाभी’ हैशटैग टॉप ट्रेंड्स में शामिल हो गया. लोग इस नई जानकारी के बाद सवाल उठा रहे हैं कि क्‍या साजिश की जो बात कही जा रही है, वह सही है. कई यूजर्स ने कांग्रेस महासचिव प्र‍ियंका गांधी पर भी निशाना साधा है. कुछ पत्रकार भी निशाने पर हैं।

#FakeNaxalBhabhi हैशटैग के जरिए कहा जा रहा है कि हाथरस कांड ‘एक सोची-समझी साजिश’ है. बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने सीधे-सीधे प्रियंका गांधी को टारगेट किया. पूर्व सांसद गीता कोटपल्‍ली ने प्रियंका की वायरल तस्‍वीर शेयर कर पूछा, “ये महिला कौन है?

यह पीड़िता की मां नहीं है तो घर में कैसे घुसी? उसे प्रियंका को गले लगाने कैसे दिया गया? इसी महिला का बरखा दत्‍त ने भी इंटरव्‍यू किया था. यह एक सोची-समझी साजिश लगती है.” बीजेपी के सौरभ ने भी वही फोटो ट्वीट कर पूछा, ‘क्‍या फेक गांधी फेक नक्‍सल भाभी को गले लगा रही हैं?’

सोशल मीडिया पर ‘भाभी’ की बात सामने आने पर कुछ पत्रकारों को भी घेरा जा रहा है. कथित भाभी का एक महिला पत्रकार ने इंटरव्‍यू किया. एक जगह वह महिला का घूंघट ठीक करती हैं. यूजर्स को इसपर भी आपत्ति है. वहीं एक अन्‍य वीडियो में वही महिला डीएम की गाड़ी के पीछे भागती दिख रही है।

यूजर्स ने उस वीडियो में दिख रही महिला को ही ‘फर्जी भाभी’ माना है. बड़ी संख्‍या ऐसे लोगों की है जो इस महिला को प्‍लांट करने के पीछे उत्‍तर प्रदेश को बदनाम करने की साजिश की तरह देख रहे हैं. जबकि केस की जांच अभी सीबीआई ने शुरू भी नहीं की है. फिलहाल उत्‍तर प्रदेश पुलिस की एसआईटी ही मामले की जांच कर रही है।

मृतका के घर रिश्तेदार बनकर रहे भीम आर्मी के लोग

भीम आर्मी हाथरस के बूलगढ़ी गांव में माहौल बिगाडऩे की साजिशकर्ता बनकर सामने आई है। पुलिस को इनपुट मिला है कि भीम आर्मी के तीन लोग पीड़िता के घर रिश्तेदार बनकर रह रहे थे। उन्होंने घर में रहकर परिजनों को सरकार के विरोध में भड़काया। इतना ही नहीं खुद को पीड़ित परिवार का रिश्तेदार बताकर भीम आर्मी के लोग मीडिया में लगातार सरकार विरोधी बयान भी देते रहे, जिसके चलते यह मुद्दा इतना बड़ा बन गया।

भीम आर्मी के चंद्रशेखर बूलगढ़ी गांव की पीड़िता का हाल जानने 27 सितंबर को जेएन मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ पहुंचे थे। यहीं से भीम आर्मी के कार्यकर्ता युवती के स्वजन के संपर्क में आए। पीड़ित युवती की 29 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में मौत हो गई थी। इसकी सूचना पर भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर भी सफदरजंग अस्पताल पहुंचे थे। उनके साथ सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने युवती की मौत के बाद हंगामा किया था। आरोपितों को फांसी की सजा की मांग करते हुए रात तक हंगामा जारी रखा था। उसी दिन रात को पीड़िता का शव गांव लाया गया और पुलिस ने रात में ही उसका अंतिम संस्कार करा दिया।

तभी से युवती के स्वजन के साथ भीम आर्मी से जुड़ी एक युवती व दो पुरुष रह रहे थे। यह खुद को रिश्तेदार बता रहे थे। यह लोग भी मीडिया को बयान दे रहे थे, जिनके निशाने पर प्रशासन और सरकार ज्यादा रही। भीम आर्मी मुखिया चंद्रशेखर चार अक्टूबर को हाथरस आए थे। एसपी विनीत जयसवाल ने बताया कि भीम आर्मी के लोग जब पीड़िता से मिलने आए थे, तो एक युवती को यहां छोड़ गए थे, यह जानकारी खुफिया तंत्र से मिली थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला जबलपुर मेडिकल कॉलेज में खुद को प्रफेसर बता रही थी. अपना नाम कथित तौर पर डॉ. राजकुमारी बताया. केवल दलित होने के नाते परिवार के लोगों को भरोसे में लेकर वह कई दिनों से यहां रह रही थी. यह फर्जी रिश्तेदार परिवार को बता रही थी कि मीडिया में क्या बयान देना है और परिवार को लगातार गाइड कर रही थी. जब पुलिस को शक हुआ तो महिला चुपचाप वहां से गायब हो गई।