ताजमहल शिव मंदिर है जिसका असली नाम ‘तेजोमहालय’ है, शंकराचार्य ने CM YOGI से की ‘दूषित प्रचार’ रोकने की अपील

पुरुषोत्तम नागेश ओक की किताब The Taj Mahal Is A Temple Palace में दावा किया गया था कि ताजमहल का असली नाम 'तेजोमहालय शिवमंदिर' है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय में काम करने वाले पुरुषोत्तम नागेश ओक ने अपनी एक किताब में यह दावा किया था कि ताजमहल वास्तव में एक प्रचीन शिव मंदिर तेजोमहालय था। उसे बाद में एक मकबरे में तब्दील कर दिया गया था। उन्होंने अपने इस दावे को साबित करने के लिए ताजमहल में दिखने वाले हिंदू प्रभाव और मुगल अभिलेखों में ताजमहल के निर्माण के बारे में कुछ भी नहीं लिखे जाने को आधार बनाया था।

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ताजमहल शिव मंदिर है जिसका असली नाम 'तेजोमहालय' है, शंकराचार्य ने CM YOGI से की ‘दूषित प्रचार’ रोकने की अपील
Photo Credit Social Media

ताजमहल एक हिंदू मंदिर था, ओडिशा के पुरी में स्थित गोवर्धन मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने ताजमहल को लेकर बड़ा दावा किया है। शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित मुगलिया इमारत के बारे में कहा कि ये प्राचीन काल में भगवान शिव का मंदिर था और इसका नाम ‘तेजो महालय’ था। उन्होंने कहा, “जिसे आजकल ताजमहल कहते हैं, उसका पुराना नाम तेजो महालय है। वहाँ शिवजी प्रतिष्ठित थे।“

इतिहासकार पी एन ओक ने इसे साबित करते हुए ताजमहल की  तस्वीर से साबित होता है कि ताज की यह इमारत अष्टकोणीय है क्योंकि हिंदू 10 दिशाओं में विश्वास करते हैं। ऊंची मीनार स्वर्ग और नींव नीचे के जगत की ओर इशारा करते हुए दुनिया को 10 दिशाओं के बारे में बताती है।

माना जाता है कि देवत्व और रॉयल्टी का उन सभी 10 दिशाओं में बोलबाला है, क्योंकि हिंदू परंपरा में रॉयल्टी और देवत्व से जुड़ी इमारतों में कुछ अष्टकोणीय विशेषताएं होनी चाहिए। ये अष्टकोणीय विशेषता साबित करती है कि ताजमहल कभी  हिंदू इमारत थी।

शंकराचार्य ने कहा कि जयपुर राजपरिवार के पास ताजमहल का पूरा इतिहास सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि विदेशी यात्रियों ने भी अपनी यात्रा को लेकर जो संस्मरण लिखे हैं, उनसे ताजमहल का वास्तविक नाम ‘तेजो महालय’ ही सिद्ध होता है। उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना ‘सुपरिचित’ बताते हुए कहा कि उन्हें इस तथ्य पर ध्यान देना चाहिए और इतिहास के नाम पर जो दूषित प्रचार किया गया है, उस पर पानी फेरने के अविलम्ब प्रयास करें।

शंकराचार्य का ये बयान गोवर्धन मठ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो के जरिए जारी किया गया है और योगी आदित्यनाथ को टैग भी किया गया है। शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के बयान के बाद सोशल मीडिया में ताजमहल को लेकर चर्चा फिर से शुरू हो गई। लोगों का मानना है कि ताजमहल को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है और भारत के सैकड़ों हिन्दू मंदिर कलाकारी और भव्यता में इससे खासे बढ़ कर हैं।

इससे पहले श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने आगरा को अग्रवन बताते हुए कहा था कि प्राचीन काल में जो स्थल हिन्दू नाम से जाने जाते थे, उनका नाम उन्हें वापस दिया जाना चाहिए। राजस्थान सरकार द्वारा लाल पत्थर के खनन पर रोक लगाए जाने के फैसले को लेकर उन्होंने कहा कि जल्द ही बातचीत के माध्यम से इसे सुलझाया जाएगा।

हाल ही में यूपी सीएम ने घोषणा की थी कि आगरा में निर्माणधीन म्यूज़ियम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम स्थापित किया जाएगा। ताजमहल के पूर्व में बन रहे इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 150 करोड़ रुपए है। इससे पहले इसका नाम ‘मुग़ल म्यूजियम’ रखा गया था, जिसे सीएम योगी ने बदल दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे नायक हैं, मुग़ल किसी भी स्थिति में हमारे नायक नहीं हो सकते हैं।