अवैध धर्मान्तरण : फ्राड ईसाई मिशनरियों व NGO गैंग पर अमित शाह की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

ईसाई मिशनरी संगठनों द्वारा अवैध धर्मांतरण पूर्वी और दक्षिण भारत में बड़े स्तर पर किया जाता है। जहां वे केरल, मिज़ोरम जैसे राज्यों में काफी हद तक ईसाई धर्म में अवैध तरह से धर्मांतरण कराने में सफल रहे, तो वहीं आंध्र प्रदेश, गोवा, तमिलनाडु, मेघालय जैसे राज्यों में उन्हें अच्छी ख़ासी छूट मिली है। जब से केंद्र सरकार ने 2014 में सत्ता संभाली है, तब से एनजीओ को विदेशी फण्ड्स के नाम पर भ्रष्टाचार करने की जो छूट मिली हुई थी, वो अब लगभग बंद हो चुकी है।

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धर्मान्तरण पर फ्राड ईसाई मिशनरियों व NGO गैंग पर अमित शाह की 'सर्जिकल स्ट्राइक'
धर्मान्तरण पर फ्राड ईसाई मिशनरियों व NGO गैंग पर अमित शाह की 'सर्जिकल स्ट्राइक'

अवैध धर्मांतरण के काले धंधे पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह कमर कस चुकी है। बता दें कि ईसाई मिशनरी संगठनों द्वारा अवैध धर्मांतरण पूर्वी और दक्षिण भारत में बड़े स्तर पर किया जाता है। जहां वे केरल, मिज़ोरम जैसे राज्यों में काफी हद तक ईसाई धर्म में अवैध तरह से धर्मांतरण कराने में सफल रहे, तो वहीं आंध्र प्रदेश, गोवा, तमिलनाडु, मेघालय जैसे राज्यों में उन्हें अच्छी ख़ासी छूट मिली हुई है।

गृहमंत्री अमित शाह ने ने धीरे-धीरे ही सही, पर अवैध धर्मांतरण के गोरखधंधे पर हंटर चटकाना शुरू कर दिया है, और मिशनरी संगठनों के FCRA  के कानून में बदलाव का प्रस्ताव संसद में रख दिया हैं। प्रस्ताव आते ही सबसे पहला रिएक्शन ऑक्सफेम संस्था की तरफ से आया हैं। ऑक्सफेम ने इसे अपने ऊपर कुठाराघात बताया हैं।

माना जा रहा है कि ऑक्सफेम का ये रिएक्शन ये बात बताने के लिए काफी है कि अमित शाह का तीर एकदम निशाने पर लगा हैं । देश के खिलाफ एजेंडा चला रही अंतरराष्ट्रीय NGO और धोखा देकर धर्मांतरण करवा रही ईसाई मिशनरियों पर कुठाराघात करने के उद्देश्य से ही ये प्रस्ताव पेश किया गया हैं।

देश के गृहमंत्री अमित शाह संसद में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन अधिनियम बिल FCRA 2020 लाने की तैयारी में हैं। जिसमें अब सरकारी अधिकारियों को किसी भी विदेशी योगदान को प्राप्त करने से रोक दिया जाएगा और FCRA अधिनियम, 2010 के तहत पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन या संगठन, गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित FCRA में प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए अपने विदेशी योगदान का 20% से अधिक का उपयोग नहीं कर सकते हैं।

एफसीआरए में मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, एफसीआरए लाइसेंस रखने वाले एनजीओ / संघ अपने प्रशासनिक अंशदान जैसे वेतन आदि के लिए अपने विदेशी अंशदान 50% तक उपयोग कर सकते हैं। इस सीमा को घटाकर 20% करने का प्रस्ताव है।

एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2020 (FCRA (Amendment) Bill 2020) में कहा गया है कि एफसीआरए के तहत पूर्व अनुमति या पंजीकरण या एफसीआरए के लाइसेंस नवीकरण का अनुरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति को अब अपने सभी पदाधिकारियों या निदेशकों के आधार नंबर (Aadhaar Number) देने होंगे।

इसमें प्रावधान है कि केंद्र सरकार किसी गैर-सरकारी संगठन (NGO) या एसोसिएशन को अपना एफसीआरए प्रमाणपत्र वापस करने की मंजूरी दे सकेगी।

उल्लेखनीय हैं कि अभी कुछ दिन पहले ही ईसाई मिशनरियों के खिलाफ गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा कदम उठाया था। चार बड़े ईसाई संगठनों की विदेशी फंडिंग का लाइसेंस निलम्बित कर दिया गया हैं। FCRA में बदलाव को फ्राड ईसाई मिशनरियों व NGO गैंग पर सर्जिकल स्ट्राइक माना जा रहा हैं।