अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विकसित होगा प्रयागराज संग्रहालय

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इलाहाबाद संग्रहालय को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विकसित किया जाएगा। इस संग्रहालय में मौजूद 70 हजार कला कृतियों के अलावा दुर्लभ पेंटिंग, धरोहर के रूप में कपड़ा व कागज के दस्तावेजों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्टोरेज का निर्माण होगा। संग्रहालय को फायर फाइटिंग सिक्योरिटी सिस्टम से लैस करने के साथ ही गैलरियों को डिजिटलाइज करने की योजना है। राजभवन की हरी झंडी के बाद इसके लिए 175 करोड़ रुपये की योजना केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को भेजी गई है। इलाहाबाद संग्रहालय को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिलाने की पहल शुरू कर दी गई है। इसे पांच वर्ष में मूर्त रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। इस संग्रहालय में धरोहरों को इस तरह प्रदर्शित किया जाएगा कि वे खराब भी न हों और पर्यटकों में देखने की रुचि भी बढ़े। इसके लिए संग्रहालय गैलरियों को डिजिटल बनाया जाएगा। सेंट्र हाल के अलावा अन्य हिस्सों में स्क्रीन लगाई जाएगी।

इस स्क्रीन पर पर्यटक संग्रहालय की काकृतियों और धरोहरों के बारे में विस्तार से जानकारी ले सकेंगे।इस संग्रहालय के विस्तार की भी योजना है, ताकि वहां अधिक से अधिक धरोहरों को प्रदर्शित किया जा सके। बेलन घाटी में बड़े स्तर पर हुई खोदाई में मिले प्रागैतिहासिक कालीन औजारों, मूर्तियों के अलावा 10 हजार से अधिक पेंटिंग व दस्तावेजों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्टोरेज बनाए जाएंगे। इस स्टोरेज के साथ गैलरियां 24 घंटे वातानुकूलित रहेंगी। कलाकृतियों की पॉलिशिंग कराई जाएगी परिसर में अलग से पावर सबस्टेशन को भी अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए एक करोड़ रुपये अवमुक्त किए गए हैं। बिजली के साथ उच्च स्तर की साफ -सफाई, पेयजल के प्रबंध किए जाएंगे। संग्रहालय को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विकसित करने की योजना को राज्यपाल राम नाईक ने स्वीकृति दे दी है।

इसी के साथ इस योजना को साकार करने के लिए प्रस्ताव वित्त आयोग को भेज दिया गया है इलाहाबाद संग्रहालय में चार गैलरियों के आधुनिकीकरण का काम पूरा कर लिया गया है। इसमें माडर्न प्रिंटिंग, टेक्सटाइल्स, अस्त्र-शस्त्र गैलरी व डेकोरेटिव आर्ट गैलरी शामिल हैं। इन गैलरियों का उद्घाटन मतगणना के बाद राज्यपाल रामनाईक करेंगे म्यूजियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए प्रस्ताव राजभवन से भेजा गया है। इसके तहत पांच वर्ष में प्रतिवर्ष 35 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना तैयार की गई है। यह प्रयागराज की बड़ी उपलब्धियों में से एक होगा। सुनील गुप्ता- निदेशक, इलाहाबाद संग्रहाय।

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