इंटरनैशनल खेल आयोजनों की मेजबानी से हाथ धोना पड़ सकता है भारत को

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नई दिल्ली। वैश्विक खेलों में भारत के आयोजन अधिकार निलंबित करने के अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के फैसले का असर अब नजर आने लगा है। भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में हुए निशानेबाजी विश्व कप के लिए पाकिस्तानी शूटर्स और उनके कोच को वीजा न देने के फैसले के बाद आईओसी ने यह फैसला किया था।

भारत के इस फैसले से वैश्विक खेलों में भारत की मेजबानी के प्रति सख्त हो गया है। इसके बाद भारत में अंतरराष्ट्रीय खेल अब लगभग ठहर गए हैं। इसके साथ ही कुछ बड़े खेल आयोजनों पर भी इसका असर दिख सकता है। आने वाले महीनों में भारत को कुछ और वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी से हाथ धोना पड़ सकता है।

चूंकि सरकार आने वाले आम चुनावों से पहले आईओसी को यह लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार नहीं दिख रही कि वह सभी खिलाड़ियों और अधिकारियों को वीजा देगी। ऐसे में अभी कुछ और बड़ी मेजबानियां गंवानी पड़ सकती हैं।

शुरुआत करें तो कुश्ती की वैश्विक संस्था- यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने संकेत दिया है कि वह इस साल जुलाई में होने वाली जूनियर एशियन चैंपियनशिप की मेजबानी छीन सकता है। इसके साथ ही उसने सभी देशों के संघों को भारतीय कुश्ती संघ से संबंध तोड़ने और उसे कोई मेजबानी न देने को कहा है। इसी तरह इस साल जून में भुवनेश्वर में होने वाले हॉकी सीरीज फाइनल्स- जो एक ओलिंपिक क्वॉलिफाइंग इवेंट है के आयोजन पर भी संकट दिख रहा है।

अंतरराष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन के अधिकारी आईओसी को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस इवेंट के आयोजन अधिकार कायम रखे जाएं। अध्यक्ष नरेंदर बत्रा भारतीय ओलिंपिक असोसिएशन के भी अध्यक्ष हैं। ऐसे में वरिष्ठ प्रशासक बत्रा इस परिस्थिति से निपटने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।

हालांकि इस समस्या का जल्द कोई समाधान निकलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया को भी 17 से 22 जुलाई के बीच ओडिशा में होने वाले कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप्स की मेजबानी को लेकर चिंता है। इस इवेंट में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के भाग लेने की उम्मीद है।

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