Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव
Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव

देवों के देव महादेव की आराधना और उनकी कृपा पाने का सबसे शुभ दिन होता है महाशिवरात्रि। इस बार महाशिवरात्रि पर बहुत ही शुभ योग बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण की चतुर्थी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। इस महाशिवरात्रि के मौके पर आइए दर्शन करते हैं।

Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव
Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिवालयों में जलाभिषेक का विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि भगवान भोले भंडारी का अति प्रिय पर्व है।

Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव
Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव

यह वह दिन है जब शिव शंकर ने कंठ में विष धारण कर लिया था और नीलकंठ बन गए थे। महाशिव रात्रि साल में दो बार आती है।

Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव
Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव

पहली फाल्गुन मास में और दूसरी श्रावण मास में। दोनों का मूलसार एक ही है भगवान शिवशंकर का जलाभिषेक करना।

Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव
Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव

फाल्गुन और श्रावण मास में आने वाली महाशिवरात्रि के धार्मिक पक्ष भी अलग-अलग हैं। पहले बात करते हैं फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि की।

Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव
Maha Shivratri 2020 : नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं महादेव

धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि को पार्वती और शिव शंकर का विवाह हुआ था।इस दिन श्रद्धालु शिव शंकर और पार्वती की पूजा-अर्चना कर शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। उपवास रखने की परंपरा भी इस पर्व के साथ जुड़ी हुई है।