प्याज की जमाखोरी और कालाबाजारी से निकले जनता के आंसू

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प्याज की जमाखोरी और कालाबाजारी से निकले जनता के आंसू
प्याज की जमाखोरी और कालाबाजारी से निकले जनता के आंसू

मुंबई। प्याज की आसमान पर पहुंचीं कीमतों पर अगले हफ्ते लगाम लग सकती है। केंद्र सरकार ने महंगे प्याज से निकले जनता के आंसू पोंछने के लिए प्याज का आयात किया है। विदेश से 1.10 लाख टन प्याज 10 दिसंबर से आना शुरू हो जाएगा। सरकार ने यह प्याज 52 से 55 रुपये प्रति किलो में मंगाया है। मंगलवार को मुंबई में प्याज की कीमत 120 रुपये प्रति किलो तक हो गई।

देश में प्याज की कुल उपज का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र का है। बेमौसम बारिश के कारण प्याज की उपज पर इस साल बहुत बुरा असर पड़ा। पिछले साल महाराष्ट्र में प्याज की कुल उपज 80.47 लाख टन थी, जो इस साल 65 लाख टन रह गई। यहां इस साल प्याज की उपज 15.47 लाख टन कम हुई है। मुंबई के जेएनपीटी बंदरगाह पर 10 दिसंबर को प्याज की 1160 टन की पहली खेप उतरेगी, जिसे देशभर में भेजा जाएगा। 17 दिसंबर तक 1450 टन, 24 दिसंबर तक 2030 टन और 31 दिसंबर तक 1450 टन प्याज मुंबई आएगा। देश के दूसरे राज्यों के बंदरगाहों पर भी विदेशी प्याज उतरेगा।

अनियन एक्सपोर्टर्स असोसिएशन के एक अधिकारी ने बताया कि मिस्र, तुर्की और नीदरलैंड से देशभर में अबतक 6000 टन प्याज अब तक पहुंच चुका है। अधिकारी ने बताया कि पिछले 3 हफ्तों में 6,000 टन प्याज की खेप भारत पहुंच चुकी है और अगले 2-3 दिनों में 1,000 टन और पहुंच जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, आयातित प्याज के लिए ट्रेडर्स को 45 से 55 रुपये किलो का भाव देना पड़ रहा है। इस भाव पर प्याज की खरीदारी से कीमतों में थोड़ी नरमी आ सकती है क्योंकि फिलहाल होलसेल में प्याज के दाम 75 से 100 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं। लासलगांव मंडी में बुधवार को प्याज के भाव 2500 से 8812 रुपये प्रति क्विंटल थे।

बेमौसम बारिश ने प्याज की उपज को बुरी तरह से प्रभावित किया। महाराष्ट्र में प्याज की फसल साल में तीन बार (खरीफ, लेट खरीफ और रबी) होती है। साल 2016-17 में महाराष्ट्र में कुल 4.71 लाख हेक्टेयर जमीन में प्याज लगाया गया और उपज करीब 89.36 लाख टन हुई थी। मगर साल 2017-18 में 5.27 लाख हेक्टेयर में प्याज की उपज 72.16 लाख टन हुई। इन दोनों साल प्याज की कीमतें बहुत कम हो गई थीं। तब तत्कालीन फडणवीस सरकार ने किसानों को आर्थिक मदद दी थी। प्याज की कीमतें गिरने से साल 2018-19 में किसानों ने प्याज कम लगाया था, फिर भी पैदावार 80.47 लाख टन हुई थी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार ने देश में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिये कई कदम उठाए हैं जिनमें इसके भंडारण से जुड़े मुद्दों का हल निकालने के तरीके शामिल हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की गई है लेकिन सरकार उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठा रही है। लोकसभा में अनुपूरक मांगों पर चर्चा के दौरान सांसद सौगत रॉय ने निर्मला से पूछा कि क्या आपके यहां प्याज नहीं खाया जाता। इस पर निर्मला बोलीं कि हमारे यहां प्याज, लहसुन का प्रयोग न के बराबर होता है इसलिए मेरे लिए यह बहुत मायने नहीं रखता। मैं ऐसे परिवार से आती हूं जहां लहसुन-प्याज का बहुत मतलब नहीं है।

NBT

कांग्रेस ने प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मंगलवार को आरोप लगाया कि बिचैलिए खा रहे हैं और सरकार इस मुद्दे पर जवाब देने से भाग रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चैधरी ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘प्याज की कीमतों में आग लगी हुई है। अगर सरकार प्याज का आयात कुछ महीने पहले करती, तो लोगों को इतनी परेशनी नहीं होती।’ चैधरी ने दावा किया, ‘सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि बिचैलियों के चलते प्याज की दर में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री, आप जरूर नहीं खाते, लेकिन बिचैलिए जरूर खाते हैं।

राज्यसभा में माकपा के सदस्य के.के. राकेश ने कहा कि देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमत 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले इसका फायदा उठा रहे हैं, लेकिन सरकार मूक दर्शक बनी हुई है।’ सरकार के एक बयान का हवाला देते हुए रागेश ने कहा कि गोदामों में 32,000 टन प्याज सड़ गया, लेकिन इसे बाजार में नहीं निकाला गया।