इकॉनमी पर सरकार की पैनी नजर, स्लोडाउन को बढ़ने नहीं दिया जाएगा : PM Modi

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नई दिल्ली । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि किसी मर्ज को दूर करने के लिए जरूरी नहीं कि दूसरे मर्ज को पाल लिया जाए। इधर मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार ने मार्केट और इकॉनमी को बूस्ट देने के लिए जो कदम उठाए हैं, उसका असर जल्द देखने को मिलेगा। मोदी सरकार ने शुक्रवार को साफ संदेश दिया कि इकॉनमी में जो मंदी की आहटें हैं, उनसे घबराने की जरूरत नहीं है। वह कई और सेक्टरों के लिए भी राहत पैकेज देने में पीछे नहीं रहेगी। शुक्रवार को घोषित कदम इसकी शुरुआत है।

यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगी। मगर इसके साथ यह भी ख्याल रखा जाएगा कि वित्तीय घाटे में बढ़ोत्तरी न हो।इंडस्ट्री चैंबर एसोचैम के प्रेसिडेंट बी.के. गोयनका का कहना है कि बेशक भारत में कुछ सेक्टरों में स्लोडाउन दिखाई दे रहा है। इसके पीछे जहां वैश्विक आर्थिक मंदी का एक कारण है, वहीं सरकार द्वारा लिए गए कुछ फैसलों और सिस्टम में सुस्ती का असर भी इन सेक्टरों पर नेगेटिव पड़ा है। अब सरकार ने इन फैसलों को वापस लिया है।

इससे माहौल सुधरेगा, निवेश बढ़ेगा। आरबीआई द्वारा लगातार रेपो रेट कम करने के बाद बैंकों ने लोन ज्यादा सस्ता नहीं किया, मगर अब सस्ता होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रोथ बढ़ाने के लिए सभी को एक साथ होकर काम करना होगा। मैंने बैंकों के साथ बैठकें कीं। सभी बैंक एमसीएलआर को रेपो रेट से जोड़ने के लिए तैयार हैं। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के तेजिंदर बावा का कहना है कि सरकार ने सरकारी बैंकों को 70,000 करोड़ रुपये देने की बात कही है।

ऐसे में बैंकों के पास लोन देने के लिए ज्यादा कैश होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि रियल्टी सेक्टर और होमबायर्स के लिए राहत पैकेज को लेकर तैयारियां चल रही है। बैठकें हो चुकी है। अगले सप्ताह हो सकता है कि दिल्ली-एनसीआर के होम बायर्स के लिए राहत पैकेजों की घोषणा की जाए।सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाने के लिए रोडमैप का भी खुलासा किया।

उन्होंने कहा कि इसमें होने वाले निवेश को लेकर कई सवाल किये जा रहे हैं, लेकिन हमारी सरकार अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा। आर्थिक मामलों का विभाग जल्द ही अलग अलग मंत्रालयों को मिला कर एक टास्क फोर्स का गठन करेगा जो यह तय करेगा कि ढांचागत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं कैसे लाई जाएं।केंद्र सरकार ने फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (एफपीआई) की मांग को मानते हुए उन पर बढ़ाए सरचार्ज को वापस ले लिया और घरेलू निवेशकों को लॉन्ग और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर बढ़ाए गए सरचार्ज से भी मुक्ति दे दी।

अब निगाहें सोमवार को शेयर मार्केट के कारोबार पर होंगी। अहम सवाल होगा कि एफपीआई क्या बिकवाली बंद करेंगे? जुलाई में एफपीआई ने 15,000 करोड़ की बिकवाली की यानी शेयरों को बेचकर शेयर मार्केट से पैसे निकाले। ऐसे में शेयर मार्केट का गिरना तय था। एफपीआई ने सरचार्ज को वापस लेने की मांग रखी थी, जो वित्त मंत्री ने मान ली है।