सुप्रीम कोर्ट खफा अनुच्छेद 370 के खिलाफ याचिका पर, मीडिया पर पाबंदी हटाने में लगेगा समय

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उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के खिलाफ दोषपूर्ण याचिकाएं दायर करने पर शुक्रवार को नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने याचिका को अर्थहीन करार दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा द्वारा दायर याचिका का कोई मतलब नहीं है। अब दोबारा याचिका दायर करने पर अगले हफ्ते सुनवाई की जाएगी।

कोर्ट ने पूछा, यह किस तरह की याचिका :  सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा, मैंने आपकी याचिका को आधे घंटे तक पढ़ा लेकिन समझ नहीं आया कि यह किस बारे में है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता एम एल शर्मा से पूछा,यह याचिका क्या है, किस तरह का है? इसे तो खारिज किया जा सकता था लेकिन रजिस्ट्री में ऐसी ही पांच अन्य याचिकाएं भी हैं, जिनमें खामियां हैं।

आगे पीठ ने कहा, आपने राष्ट्रपति का आदेश निरस्त करने का अनुरोध नहीं किया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इसमें क्या अनुरोध किया गया है। पीठ ने कहा, इस तरह के मामले में अगर यह याचिका है तो इसका कोई मतलब नहीं है। शीर्ष अदालत ने संबंधित वकीलों से कहा कि वे अनुच्छेद 370 को लेकर दायर अपनी छह याचिकाओं की खामियों को दूर करें और इसके साथ ही उसने सुनवाई स्थगित कर दी।

सवाल
प्रधान न्यायाधीश की पीठ ने याचिका को अर्थहीन करार दिया।
कहा, याचिका को सही करके दोबारा दायर करें।

मीडिया पर पाबंदी हटाने में अभी समय लगेगा
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में मीडिया पर लगाई गई पाबंदियां हटाने के लिए दायर याचिका पर कोई निर्देश देने से पहले वह कुछ समय इंतजार करेगा। इससे पहले केंद्र ने न्यायालय को सूचित किया कि यह पाबंदियां धीरे-धीरे हटाई जा रही हैं।  मीडिया पर लगी पाबंदियां हटाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति में सुधार हो रहा है।