‘SC के फैसले से घर खरीदारों के दर्जे पर प्रोजेक्ट पूरा करने में मिलेगी मदद’

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दिवाला प्रक्रिया में घर खरीदारों का वित्तीय कर्जदाता का दर्जा बरकरार रखने के उच्चतम न्यायालय के फैसले से लटकी पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी। जमीन – जायदाद से जुड़े डेवलपर और सलाहकारों ने यह बात कही। हालांकि, बिल्डरों का मानना है कि खरीदारों को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), उपभोक्ता अदालतों और रीयल एस्टेट नियामकों का दरवाजा खटखटाने की अनुमति देने से भ्रम पैदा हो सकता है।

शीर्ष न्यायालय ने शुक्रवार को अपने फैसले में दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में उस संशोधन को बरकरार रखा है जिसमें घर खरीदारों को वित्तीय कर्जदाता का दर्जा दिया गया है। पीठ ने स्पष्ट किया है कि केवल वास्तविक घर खरीदार ही बिल्डर के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध कर सकते हैं।

आवास विकास कार्य में लगी कंपनियों के मंच नारेडको के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि यह फैसला परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में मदद करेंगे और बैंक इसके लिए कर्ज निपटान प्रक्रिया में जल्दी नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि घर खरीदारों को वित्तीय कर्जदाताओं का दर्जा देने से ऋणदाताओं और उपभोक्ताओं को लाभ होगा।

हालांकि, हीरानंदानी ने कहा कि शीर्ष न्यायालय ने परियोजनाओं में देरी के मामले में घर खरीदारों को तीन अलग – अलग निकायों एनसीएलटी , रेरा और उपभोक्ता फोरम में जाने की भी अनुमति दी है। इससे बड़ा भ्रम पैदा होगा और हर निकाय का नजरिया अलग होगा। सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर अभिलाश पिल्लई ने कहा कि यह निवेशक – घरखरीदारों के लिए नहीं बल्कि वास्तविक घर खरीदारों के लिए ऐतिहासिक फैसला है।