मौत के बाद गूगल की मदद से गांव का चला पता , जानें पूरा मामला

21

लोधी कॉलोनी में 10 साल पहले हुई दुर्घटना में अपनी आवाज और याददाश्त खो चुके जीत बहादुर बासनेट जीते जी अपने परिजनों से नहीं मिल सके। मगर पुलिस ने गूगल की मदद से उनके गांव का पता लगाकर उनका शव परिजनों तक पहुंचा दिया। वह एक सड़क हादसे के बाद से जसोला आश्रम में रह रहे थे, मगर उन्हें अपने बारे में कुछ भी याद नहीं था।

दरअसल, 2 नवंबर 2018 को पुलिस को पीसीआर कॉल मिली थी कि जसोला आश्रम में रहने वाले एक व्यक्ति की बुखार के कारण मौत हो गई है। वह व्यक्ति बोलने में असक्षम था। साथ ही वह अपनी याददाशत भी खो चुका था। मौके पर पहुंची फतेहपुर बेरी थाना पुलिस ने जब उस व्यक्ति के कागज देखे तो पाया कि 10 साल पहले एक कार की टक्कर के कारण इन्हे गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद फतेहपुर बेरी थाना पुलिस ने मामले की जांच लोधी कॉलोनी थाने को सौंप दी।

जांच आरंभ हुई तो पता चला कि 10 साल पहले दुर्घटना होने के बाद उन्हे एम्स में रखा गया था। इलाज के बाद उनके बोल न पाने के कारण उन्हें पुलिस ने आश्रम में रखवा दिया था। आश्रम में उनका मानसिक इलाज भी चल रहा था। आश्रम में रहने के दौरान उन्होंने कई जगह धौलगिरी लिख रखा था। इस जानकारी पर पुलिस ने गूगल पर ढोलगिरी डाल कर देखा तो वह नेपाल के गांव की लोकेशन दिखाने लगा। पुलिस ने फिर नेपाल अंबेसी में भी संपर्क किया।इस दौरान पता चला कि इस जगह का नाम अंचल धौलागिरी है। फिर पुलिस ने नेपाल जाकर उनके परिवार का पता लगाया। इसके बाद उनका शव परिवार को सौंप दिया गया।

आरोपी पर केस चलेगा

जीत बहादुर का परिवार उन्हें 10 सालों से ढूंढ रहा था, लेकिन जीत की पहचान न हो पाने और उनकी आवाज चले जाने के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्हें टक्कर मारने वाले चालक को भी सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया था। अब उनकी पहचान होने पर पुलिस उस पर दोबारा मुकदमा चलाएगी।