प्रयागराज स्टेशन पर 2013 महाकुंभ के दौरान हादसे के लिए रेलवे दोषी

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महाकुंभ 2013 के दौरान 10 फरवरी को मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे की एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखी गई है। इस रिपोर्ट के साथ ही आयोग की संस्तुतियों पर किए गए कार्यवाही का विवरण भी है। आयोग ने जांच में रेल प्रशासन द्वारा लापरवाही पूर्वक भ्रम फैलाने वाली सूचनाओं को घोषित किया जाना प्रमुख कारणों में से एक माना है। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीष ओंकारेश्वर भट्ट की अध्यक्षता में इस एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन 17 फरवरी 2013 को किया गया था। आयोग ने घटना के कारणों, किए गए प्रयासों का परीक्षण, घटना के लिए उत्तरदायित्व का जिक्र करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों इसके लिए कई सुझाव दिए हैं।

चिकित्सा में लापरवाही के लिए अधिकारी जिम्मेदार

रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि रेल प्रशासन द्वारा चिकित्सक और चिकित्सीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई थी। इसके लिए तत्कालीन डीआरएम हरिंद्र राव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी जि्म्मेदार हैं। राजकीय रेलवे पुलिस के पास न तो कोई एंबुलेंस था और ना ही कोई चिकित्सक नियुक्त था। हालांकि रेलवे पुलिस ने इसके लिए रेल प्रशासन से अनुरोध किया था। घटना घटित होने के बाद रेलवे प्रशासन द्वारा स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराए जाने के बाद भी रेलवे पुलिस ने स्काउट्स की मदद से घायलों को अस्पताल भेजा था। परिवहन निगम सिविल लाइंस बस स्टेशन से रवाना हुईं बसों का रिकार्ड तक नहीं उपलब्ध करा सका।

आयोग ने दिए हैं ये सुझाव 

महाकुंभ या अर्द्धकुंभ के दौरान इलाहाबाद रेलवे जंक्शन से मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन ना किया जाए। ट्रेनें इस प्रकार चलाई जाएं कि जंक्शन पर यात्रियों का दबाव कम से कम रहे। जंक्शन पर दो अतिरिक्त फुट ओवरब्रिज बनाया जाए। साथ ही दो एफओबी को एकल दिशा मार्ग के रूप में प्रयोग किया जाए। एफओबी या अंडरग्राऊंड रास्तों के नहीं बनने की दशा में वर्तमान एफओबी को ही एकल दिशा मार्ग में परिवर्तित किया जाए। जंक्शन परिसर के सिविल लाइंस की तरफ स्थित पुरानी कालोनी के आवासों को खाली कराकर ध्वस्त कर दिया जाए। रेलवे स्टेशन पर एक आपात गलियारा सुरक्षित रखा जाए जिससे घायलों को तत्काल चिकित्सीय सहायता दी जा सके। मुख्य पर्वों से एक दिन पहले और एक दिन बाद तक मालगाड़ियों का संचालन रोका जाए। फाफामऊ गंगा नदी पर पक्के पुल के अलावा एक और पक्का पुल बनाया जाए। कम से कम एक महीने तक रेलवे और रोडवेज के किराये में समानता लाई जाए। प्लेटफार्म और परिसर में इतनी मात्रा में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं कि हर हिस्से पर नजर रखी जा सके। रेलवे स्टेशन पर रैपिड एक्शन फोर्स अथवा भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष बलों का प्रयोग किया जाए। प्रदेश शासन के स्तर पर स्थाई रूप से मेला प्रबंधन विभाग गठित की जाए। जिसका मुख्यालय इलाहाबाद में हो। सदन को बताया गया है कि सरकार ने आयोग द्वारा की गई संस्तुतियों और सुझावों पर कार्यवाही शुरू की है।

 रिपोर्ट में बताईं घटना की यह वजहें 

-मेला स्पेशल गाड़ियों का समय से नहीं चलाया जाना
-रेल प्रशासन द्वारा भ्रम उत्पन्न करने वाली सूचनाएं प्रसारित किया जाना
-रेल परिसर में यात्रियों के आवागमन के लिए एकल दिशा मार्ग की व्यवस्था नहीं किया जाना
-सिविल लाइंस की तरफ से इलाहाबाद जंक्शन पर यात्रियों के आगमन को रोकने ले लिए प्रभावी व्यवस्था का न किया जाना
-दुर्घटना के दिन और उससे एक दिन पूर्व से मालगाड़ियों का आवागमन बंद नहीं किया जाना
-यात्री आश्रय स्थल का बहुत छोटा होना
-फुट ओवरब्रिज-तीन को घटना से पूर्व और बाद में नहीं खोला जाना
-भीड़ की दशा में पूर्व से प्रस्तावित योजनाओं का क्रियान्वयन जनपद पुलिस द्वारा नहीं किया जाना
-भीड़ बढ़ने की जानकारी होने पर भी भी़ड़ को डायवर्ट करने संबंधी योजना का क्रियान्वयन नहीं किया जाना
-राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा वापसी वाले तीर्थयात्रियों को पर्याप्त संख्या में वापस ले जाने में असफल रहना
स्थिति संभावने की कोशिश के दौरान भी हुई गलतियां
-आरपीएफ जवानों द्वारा पॉलीकार्बोनेट के डंडों का प्रयोग किए जाने से कई यात्रियों को चोटें आईं। इन डंडों का प्रयोग यात्रियों पर किया जाना ही दुर्घटना का कारण बना। भीड़ नियंत्रण में इन डंडों के प्रयोग की उपयोगिता शोध का विषय है।
-कुंभ मेले की तैयारियों के लिए हुई बैठकों में चिकित्सीय दृष्टिकोण को महत्व नहीं दिया जाना
-दुर्घटना के बाद रेल अधिकारियों द्वारा मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया जाना