खुलासा: आर्थिक आरक्षण पर एम्स में इस साल एक भी दाखिला नहीं

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए इस साल आर्थिक आरक्षण लागू नहीं किया गया है। संस्थान में एमबीबीएस में एक भी छात्र को ईडब्ल्यूएस आरक्षण के आधार पर दाखिला नहीं दिया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स सहित केंद्र के चिकित्सा संस्थानों को दाखिलों में आर्थिक आरक्षण लागू करने का निर्देश दिया था।

दिल्ली स्थित एम्स में एमबीबीएस की 100 सीटें उपलब्ध हैं। इनमें से 10 फीसदी सीटों पर आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के दाखिले होने थे। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने आर्थिक आरक्षण लागू करने के लिए संस्थान में सीटें बढ़ाने के लिए कहा था। हालांकि एम्स ने इस साल जरूरी सुविधाएं न होने की बात कहकर इस सत्र में आर्थिक आरक्षण लागू न करने के लिए छूट मांगी थी।

एम्स प्रशासन का कहना है कि वे इस साल 25 अतिरिक्त छात्रों के लिए छात्रावास, लेक्चर रूम आदि सुविधाएं बढ़ाने में असमर्थ है। ऐसे में अगले अकादमिक सत्र से ही आर्थिक आरक्षण को लागू कर पाएंगे। देश के 14 एम्स में एमबीबीएस की 1200 सीटों के लिए 25 और 26 मई को परीक्षा हुई थी।

छात्रावास खाली कराए
एम्स में लंबे समय से छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों को छात्रावास की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस साल एम्स के छात्रावास संख्या 7 और 8 से रेजिडेंट डॉक्टरों को खाली कराकर एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्रों को दिए गए हैं। पहले इनमें एक कमरे में एक छात्र रहता था अब दो छात्र एक कमरे में रहेंगे।

एएमयू में भी लाभ नहीं
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी आर्थिक आरक्षण के तहत किसी छात्र को दाखिला नहीं मिला है। प्रधानाचार्य प्रो. एससी शर्मा ने कहा, अकादमिक काउंसिल की बैठक के बाद ही फैसला लागू होगा। उधर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने कहा है कि इस सत्र से बढ़ी सीटों पर प्रवेश लिया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया अगस्त में पूरी होगी।