बाराबंकी। बाराबंकी जिले में जहरीली शराब से 15 लोगों की मौत के बाद सरकार की आखें खुली और सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। राज्य सरकार द्वारा 14 अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद अब शराब की दुकान के ठेकेदार दानवीर सिंह, सेल्समैन पप्पू जायसवाल और सहयोगी आशीष के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा राज्य सरकार ने मृतकों के परिवार को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने की भी घोषणा की है।

बाराबंकी में मंगलवार को जहरीली शराब पीने से एक ही परिवार के 4 लोगों समेत 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने गांव के पास ही स्थित देसी शराब के सरकारी ठेके से शराब लेकर पी थी, लेकिन ठेकेवाले ने उन्हें मिलावटी शराब दे दी।

गांववालों ने बताया कि शराब पीने के बाद अचानक इन लोगों को दिखना बंद हो गया और इनमें से अब तक 15 की जान चली गई है। आईजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार ने बताया, अब तक इस मामले में जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी अधीक्षक, आबकारी विभाग के 3 हेड कॉन्स्टेबल्स और 5 कॉन्स्टेबल्स को सस्पेंड किया जा चुका है। इसके अलावा पुलिस के एक इंस्पेक्टर, एक सब-इंस्पेक्टर और दो सिपाहियों को भी सस्पेंड किया गया है।

सीएम ने पूरे मामले में दुख व्यक्त करते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इलाके के लोगों का आरोप है कि दानवीर सिंह के ठेके से नकली शराब बनाकर बेची जाती थी। दानवीर की ग्रामीण इलाके में शराब की अवैध फैक्ट्री है। वह यहां पर नकली शराब बनवाकर अपने सरकारी ठेके से बेचता था।

आरोप है कि सरकार की ओर से आने वाली शराब की बोतलों में उतना फायदा नहीं होता, जितना नकली शराब बनाकर बेचने में होता है इसलिए वह नकली शराब बनाकर दो से तीन गुना फायदा कमाता था।