अमित शाह कैबिनेट में , फिर बीजेपी का नया अध्यक्ष कौन बनेगा ?

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पीएम मोदी और अमित शाह-file photo

नई दिल्ली।  अगर शाह मोदी कैबिनेट में जिम्मेदारी संभालते हैं तो फिर यह भी तय है कि पार्टी उनसे संगठन के अध्यक्ष पद को छोड़ने के लिए कहेगी।  बीजेपी में अब इस बात की चर्चाएं तेज हो गई हैं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की मोदी सरकार में क्या भूमिका होगी? माना जा रहा है कि शाह को प्रधानमंत्री मोदी के नए मंत्रिमंडल में कोई अहम जिम्मेदारी मिलना तय है। 17वीं लोकसभा चुनावों के लिए जब अमित शाह ने गांधी नगर से अपना नामांकन भरा था, तभी से इस बात सुगबुगाहटें तेज हो गई थीं कि चुनावों के बाद प्रधानमंत्री मोदी की नई सरकार में अमित शाह किसी अहम जिम्मेदारी को जरूर संभालते नजर आएंगे।

अब गुरुवार (30 मई) को जब राष्ट्रपति भवन में नई सरकार के गठन के लिए शपथ समारोह शुरू होगा, तब प्रधानमंत्री मोदी के नए कैबिनेट की तस्वीर साफ होगी। साथ ही इस पर से भी पर्दा उठ जाएगा कि अमित शाह को मोदी कैबिनेट में जगह मिलती है या नहीं। पार्टी में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि अगर शाह सरकार में जिम्मेदारी संभालते हैं तो फिर उन्हें पार्टी की जिम्मेदारी छोड़नी होगी।

क्योंकि बीजेपी इस समय ‘एक व्यक्ति- एक पद’ के सिद्धांत पर काम कर रही है। ऐसे में ये चर्चाएं भी जोरों पर चल रही हैं कि अगर शाह मंत्रिमंडल में आते हैं तो फिर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा या पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान में से किसी एक को बीजेपी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वैसे अमित शाह ने पार्टी में अध्यक्ष पद संभालने के बाद बीजेपी का ग्राफ जिस अंदाज में बदला है उनका रिप्लेसमेंट तलाशना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।

शाह के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी ने हर स्तर के चुनावों में अपना जादुई प्रभाव छोड़ा है। अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने देश भर में हुए नगर निगम, विधानसभा चुनावों से लेकर लोकसभा चुनावों तक में रेकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया है। अमित शाह ने बीजेपी में सबसे सफल अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल किया है। सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि मोदी और शाह की जोड़ी बीजेपी सरकार की दूसरी पारी के लिए मंत्रियों के नाम पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस बार सरकार का फोकस नई नौकरियों का सृजन है।

इसके साथ-साथ नई सरकार कृषि, मत्स्य, खाद्य प्रसंस्करण, माइनिंग, कोयला, लघु-उद्योग, टेक्स्टाइल, हाउसिंग, स्टील और वाणिज्य पर भी फोकस करेगी। ये पोर्टफोलियो भले ही सुनने में बहुत आकर्षक न लगते हों, लेकिन प्रधानमंत्री की योजनाओं के मुताबिक ये अति महत्वपूर्ण श्रेणी में आते हैं। पार्टी सूत्रों ने यह भी बताया कि 2014 में मोदी ने अपने विश्वासनीय साथियों से राय-मशविरा करने के बाद मंत्रालयों का बंटवारा तय किया था। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल के लिए व्यक्ति की कार्यक्षमता का आकलन कर खुद से निर्णय लेंगे।