मुस्लिमों की भीड़ ने मच्छिंद्रनाथ मंदिर में ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए, आरती को किया बाधित

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हर साल मछिंद्रनाथ के भक्त मछिंद्रनाथ के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मलंग गढ़ किले तक माघ पूर्णिमा श्रीमालंग यात्रा नामक एक धार्मिक यात्रा करते हैं। कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण, इस वर्ष की यात्रा रद्द कर दी गई थी। लेकिन शिवसेना के आग्रह पर, हिंदू परंपराओं के अनुसार, हिंदुओं को मछिंद्रनाथ के मंदिर में सभी धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी गई।

सरकारी नियमों के अनुसार- वार्षिक स्नान, पालकी, गण्डमाला, नैवेद्य, महा आरती- को सरकारी अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित 50 भक्तों की उपस्थिति की अनुमति दी गई।

लगभग 50 से 60 मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मलंग गढ़ किले के ऊपर बने मच्छिंद्रनाथ के प्राचीन मंदिर में घुसकर हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही आरती को बाधित करने के लिए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए। शिवसेना के मुखपत्र सामना में प्रकाशित रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है।

यह वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल हो गया है। वीडियो में, मुसलमानों की भीड़ को ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए हिंदू भक्तों को उनके अनुष्ठान करने के खिलाफ धमकाते हुए देखा जा सकता है। कट्टरपंथियों को यह रास नहीं आया और उन्होंने आरती को बाधित करने की योजना बनाई।

जैसे ही हिंदू संगठनों को इस बारे में पता चला, उन्होंने पुलिस को इसके बारे में सूचित किया। पुलिस ने कोरोना वायरस प्रतिबंधों का हवाला देते हुए केवल सात हिंदू भक्तों को आरती के लिए मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी।

हिंदू संगठनों ने मंदिर में तोड़-फोड़ करने वाले मुस्लिमों के खिलाफ हिल रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत की। हालाँकि, पुलिस ने आश्वासन दिया कि वे मामला दर्ज किए बिना ही जाँच करेंगे। हिंदू समूहों ने पुलिस को घटना की जाँच करने और अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए 4 दिनों का अल्टीमेटम दिया, इसमें विफल रहने पर उन्होंने व्यापक आंदोलन शुरू करने की बात कही।

यह घटना 28 मार्च को रात 8 बजे हुई। बताया जा रहा है कि जब पुलिस ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो मुस्लिम भीड़ ने पुलिसकर्मियों के कॉलर पकड़ लिए और उन्हें धक्का दे दिया। मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

हिंदू भक्तों का मानना है कि यह स्थान नाथ संप्रदाय के बाबा मछिंद्रनाथ का विश्राम स्थल है और पेशवाओं ने पूजा करने के लिए केतकर नामक एक ब्राह्मण परिवार को सौंपा था। हर साल हिंदू रीति-रिवाजों से यहाँ पूजा की जाती है, खासकर माघ पूर्णिमा पर भव्य आरती का आयोजन किया जाता है।

हालाँकि, मुसलमानों का दावा है कि यह सूफी फकीर हाजी अब्दुल रहमान शाह मलंग उर्फ मलंग बाबा का पवित्र स्थान है। उनका दावा है कि वह 13वीं शताब्दी में यमन से आए थे।

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