जागिए और जगाइए….! आपको ये सच दिखने लगेगा..!

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जागिए और जगाइए....! आपको ये सच दिखने लगेगा..!
जागिए और जगाइए....! आपको ये सच दिखने लगेगा..!

हाल ही में कुछ काम से एक फिटनेस ट्रेनिंग सेंटर में गया था। इस फिटनेस ट्रेनिंग सेंटर में प्रातः जिम में आने वाले लोगों को फिटनेस ट्रेनिंग देना, वजन कम करने, या मसल्स बनाने के लिये ट्रेनिंग देना, डाइट प्लान बनाना आदि सिखाया जाता है।

ऐसे सेंटर से सिखने वाले विद्यार्थियों को किसी निजी अमेरिकी संस्थान का सर्टिफिकेट दिया जाता है और ऐसे सर्टिफिकेट प्राप्त विद्यार्थियों को जिम में अच्छी खासी नौकरी भी मिल जाती हैं और काफी विद्यार्थी तो कई घर में निजी ट्रेनर के तौर पर भी काम करते है।

इसमें पुरुष एवं महिलाओं के लिये अलग अलग कोर्स होते हैं। लेकिन विद्यार्थी कोई भी कोर्स चुन सकते हैं। यहाँ तक तो सब ठीक था।

लेकिन जो अहम बात सामने आयी तो सिर घूम गया। जब गहराई में देखा, तो ये पाया के इसमंे शिक्षा लेने वाले ज्यादातर विद्यार्थी मुस्लिम समाज से थे।

इससे भी ज्यादा चैकाने वाली बात ये थी के इनमें से लगभग सभी मुस्लिम समाज के विद्यार्थी महिलाओं के लिये दी जाने वाली फिटनेस ट्रेनिंग का ही कोर्स कर रहे थे।

जागिए और जगाइए....! आपको ये सच दिखने लगेगा..!
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अब सवाल ये उठता है कि जो समाज छोटी बच्ची से लेकर अस्सी-नब्बे साल की बुढ़ी अम्मा तक को बुरखे में ढक कर रखता है, जो औरतों को खेती समझता हैं, जो मां, बहन, बेटी, बीबी, बहु, नातिन जैसे पवित्र रिश्तों को भी नहीं मानता, समझता और घर की औरतों की गोद हमेशा भरी हुई रखता है, उस समाज को अचानक से महिलाओं के स्वास्थ्य और फिटनेस में इतनी रुचि कहां से पैदा हो गयी ?

जब इस सेंटर के मलिक से जानकारी की गयी कि इतने हिन्दू बहुल इलाके में आपके फिटनेस ट्रेनिंग में इतने मुस्लिम लडके क्योें और कहां से आ गये ? अब फिटनेस ट्रेनिंग के मालिक का जवाब सबसे ज्यादा चैकाने वाला था।

उन्होंने बताया फिटनेस ट्रेनिंग में सबसे ज्यादा मुस्लिम लड़के ही आते हैं। इसकी खास वजह ये हैं !

एक तो इस कोर्स को करने के लिये ज्यादा पढ़ा-लिखा होने की जरुरत नहीं होती।

दूसरा ये लडके यहाँ से सिखने के बाद किसी जिम में सुबह या शाम की पार्ट टाईम नौकरी कर लेते हैं। जब सुबह की नर्म-सर्द हवाओं मंे हिंदू लड़के बिस्तर में लेटे रहेते हैं उस वक्त ये जिम में कसरत कर बॉडी बना रहे होते हैं।

तीसरा ये जिम में सीखने के बाद दस ग्यारह बजे तक फ्री हो जाते है और फिर दोपहर में कई जिम फिटनेस सेंटर्स में सिर्फ महिलाओं के लिये स्पेशल ट्रेनिंग बैच होते हैं, इनमें ये दुसरी नौकरी करते हैं, जिससे ये वहां आने वाली हिन्दू महिलाओं और लड़कियों से नजदिकियां बढ़ा सके।

चैथा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और चैकाने वाला, आजकल इनके धर्मस्थलों, मदरर्सो में मुस्लिम युवाओं को फिटनेस, बॉडी बनाना, मार्शल आर्ट्स आदि के पाठ पढ़ाये जा रहे हैं। ये सब काफी चैकाने वाला है।

जहां बीस-तीस मीटर दौडने से अधिकतर हिंदू युवकों का धुआं निकल जाता हैं, वही ये शांतीप्रिय समुदाय फिटनेस और मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग ले कर चुस्त दुरुस्त हो रहा है।

इतना ही नहीं, जहाँ हिंदू युवक सिर्फ परमानेंट नौकरी की लालसा में बेरोजगार घूम रहा है, वही ये लोग उन सारे छोटे मोटे कारोबारांे में शिरकत कर रहे हैं जो कभी हिन्दूओं के हुआ करते थे।

इसमें भी इन शांती प्रिय लोगों की घुसपैठ उन कारोबारों में ज्यादा हैं जहाँ हिंदू औरतों का ज्यादा आना जाना होता हैं, जैसे के फल और सब्जी बेचना, दर्जी और लेडीज टेलर, साड़ी, ड्रेस मटेरियल, लेडीज कपडे़ बेचना, लेडीज अंडरगार्मेंट्स के दुकान, लेडीज कॉस्मेटिक्स, मेकअप मटेरियल के दुकान, युनिसेक्स ब्युटी पार्लर, जिम और फिटनेस सेंटर्स जहाँ लडकियां और महिलाएं जाती हों, गर्ल्स स्कूल-कॉलेज के आसपास छोटी मोटी दुकानें, इन सब में आजकल शांती प्रिय समुदाय भारी मात्रा में शिरकत कर रहे हैं। अगर हिंदू आज नहीं सुधरा तो आनेवाला भविष्य सच में बडा मुश्किल होनेवाला हैं।

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