केरल की एक क्रूर कुप्रथा की दर्दनाक कहानी : यहां महिलाओं को छाती ढंकने पर देना पड़ता था ‘ब्रेस्ट टैक्स’

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केरल की एक क्रूर कुप्रथा की दर्दनाक कहानी : यहां महिलाओं को छाती ढंकने पर देना पड़ता था 'ब्रेस्ट टैक्स'
Credit- social media

केरल के इतिहास के पन्नों में छिपी ये कहानी करीब डेढ़ सौ साल पुरानी है। केरल के त्रावणकोर में निचली जाति की महिलाओं के सामने अगर कोई अफसर, ब्राह्मण आ जाता था तो उसे छाती से अपने वस्त्र हटाने होते थे या छाती ढकने के एवज में टैक्स देना होता था। महिलाएं अगर अपनी छाती को ढंकती थीं तो उनके स्तन के आकार पर टैक्स भरना होता था। रिपोर्ट के मुताबिक, ये टैक्स त्रावणकोर के राजा के दिमाग की उपज थी।

केरल की एक क्रूर कुप्रथा की दर्दनाक कहानी : यहां महिलाओं को छाती ढंकने पर देना पड़ता था 'ब्रेस्ट टैक्स'
केरल की एक क्रूर कुप्रथा की दर्दनाक कहानी : यहां महिलाओं को छाती ढंकने पर देना पड़ता था ‘ब्रेस्ट टैक्स’

केरल में महिलाएं अपने स्तनों को ढकने के लिए कर का पूरा भुगतान करती थीं, जो लोग भुगतान करने में असमर्थ थे, उन्होंने अपने ऊपरी शरीर को नग्न रखा था। यह कर शूद्रों और दलितों पर लगाया गया था । इन महिलाओं को नग्न स्तनों के साथ उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

यहां तक ​​कि अपने स्तनों को ढकने वाली महिलाओं को भी नहीं बख्शा जाता था, अधिकारी आते थे और अपने हाथों से करदाता महिलाओं के आकार और वजन की जांच करते थे, अपमान करते थे।

केरल की एक क्रूर कुप्रथा की दर्दनाक कहानी : यहां महिलाओं को छाती ढंकने पर देना पड़ता था 'ब्रेस्ट टैक्स'
केरल की एक क्रूर कुप्रथा की दर्दनाक कहानी : यहां महिलाओं को छाती ढंकने पर देना पड़ता था ‘ब्रेस्ट टैक्स’

बाद में इस कुप्रथा का एक महिला ने डटकर मुकाबला किया। वह त्रावणकोर के चेरथला की रहने वाली थीं। वह काफी सुंदर थीं जिस वजह से उनको लोग नांगेली के नाम से पुकारते थे। अन्य दलित महिलाओं की तरह उनको भी सार्वजनिक स्थानों पर अपने स्तन को खुला रखने के लिए मजबूर किया गया। लेकिन उन्होंने इस कुप्रथा का डटकर मुकाबला करने का फैसला किया।

जब टैक्स वसूलने वाले अधिकारी को अपने दरवाजे पर देखा तो नांगेली ने राजा का आदेश मानने से इनकार कर दिया। कुछ देर सोचने के बाद वह अपनी झोपड़ी के अंदर गईं।  नंगली  ने अपने स्तनों को काटकर और उन्हें अधिकारी के सामने पेश करके इस कानून का विरोध किया, वह खून की कमी से मर गई, जिसके परिणामस्वरूप इस कानून का विरोध हुआ।

केरल की एक क्रूर कुप्रथा की दर्दनाक कहानी : यहां महिलाओं को छाती ढंकने पर देना पड़ता था 'ब्रेस्ट टैक्स'
केरल की एक क्रूर कुप्रथा की दर्दनाक कहानी : यहां महिलाओं को छाती ढंकने पर देना पड़ता था ‘ब्रेस्ट टैक्स’

इस घटना के बाद 1814 में त्रावणकोर के राजा ने ब्रेस्ट टैक्स को खत्म कर दिया। लेकिन इसके बाद भी यह कुप्रथा प्रचलन में रही। जब 26 जुलाई, 1859 को ब्रिटिश शासन आने के बाद एक कानून बना तो यह कुप्रथा पूरी तरह समाप्त हुई।   क्रेडिट्स: मुलकरम (लघु फिल्म)

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