मोदी सरकार का बड़ा फैसला: ‘हलाल’ शब्द सरकारी दस्तावेज से मोदी सरकार ने एक ‘झटके’ में किया खत्म, इस्लामी ‘हलाल’ सर्टिफिकेट का खेल बंद

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भारत सरकार के ‘कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority)’ APEDA ने अपने रेड मीट मैन्युअल में से ‘हलाल’ शब्द को हटा दिया है और इसके बिना ही दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए लम्बे समय से अभियान चला रहे लोगों ने सरकार को बधाई दी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल को धन्यवाद दिया। सरकार के इस कदम के बाद अब ‘हलाल’ सर्टिफिकेट की ज़रूरत समाप्त हो जाएगी और सभी प्रकार के वैध मीट कारोबारी अपना पंजीकरण करा सकेंगे।

APEDA ने अपने ‘फूड सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम’ के स्टैंडर्ड्स और क्वालिटी मैनेजमेंट के डॉक्यूमेंट में बदलाव किया है। पहले इसमें लिखा हुआ था कि जानवरों को ‘हलाल’ प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करते हुए जबह किया जाता है, जिसमें इस्लामी मुल्कों की ज़रूरतों को ध्यान में रखा जाता है। अब इसकी जगह लिखा गया है, “मीट को जहाँ आयात किया जाना है, उन मुल्कों की ज़रूरतों के हिसाब से जानवरों का जबह किया गया है।”

उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल को धन्यवाद दिया। सरकार के इस कदम के बाद अब ‘हलाल’ सर्टिफिकेट की ज़रूरत समाप्त हो जाएगी और सभी प्रकार के वैध मीट कारोबारी अपना पंजीकरण करा सकेंगे। हरिंदर सिक्का ने इसे बिना किसी भेदभाव के ‘एक देश, एक नियम’ के तहत लिया गया फैसला बताया और कहा कि ये ‘हलाल’ मीट परोस रहे रेस्टॉरेंट्स के लिए भी एक संदेश है।

 

क्या होता है ‘हलाल’ और ‘हराम’?

आम तौर पर ‘हलाल’ शब्द मांस वगैरह के सन्दर्भ में इस्तेमाल होता है. इस्लामिक काउंसिल के अनुसार, ‘हलाल’ एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है कानून सम्मत या जिसकी इजाज़त शरिया (इस्लामिक कानून) में दी गई हो. ये शब्द खाने-पीने की चीज़ों, मीट प्रोडक्ट्स, कॉस्मेटिक्स, दवाइयां, खाने में पड़ने वाली चीज़ों- सब पर लागू होता है।

‘हराम’ उसका ठीक उलट होता है. यानी जो चीज़ इस्लाम में वर्जित है। लिपस्टिक से लेकर दवाइयां तक- सब कुछ ‘हलाल’ और ‘हराम’ की श्रेणी में बांटे जा सकते हैं।

सत्तू और नमक के पैकेट पर ‘हलाल’ लोगो लगाने का क्या मतलब है । खाने-पीने की आम चीज़ों को भी हलाल सर्टिफिकेट लगाकर बेचा जा रहा है, जिसकी कोई ज़रूरत नहीं है। भारत में वेजिटेरियन खाने को लेकर ‘हलाल’ या ‘हराम’ के सर्टिफिकेट की कोई ज़रूरत नहीं है। ये नियम उन प्रोडक्ट्स पर लागू होता है, जिनमें जानवरों के मांस या उनके शरीर के किसी भी हिस्से का इस्तेमाल हुआ हो। भारत में ये सर्टिफिकेशन का काम मुख्य रूप से जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द जैसे संस्थान करते हैं। इनका अपना हलाल ट्रस्ट है, जो इन सभी नियमों का ध्यान रखते हुए सर्टिफिकेशन देता है।

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